Vikram-1 Successful Launch: भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए आज का दिन ऐतिहासिक बन गया। निजी स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अपने पहले ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण कर नई उपलब्धि हासिल की। यह मिशन 'आगमन' नाम से लॉन्च किया गया, जिसके तहत कई छोटे उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा (लो-अर्थ ऑर्बिट) में स्थापित किया गया। इस सफलता को भारत के निजी स्पेस सेक्टर के लिए एक बड़े मील के पत्थर के रूप में देखा जा रहा है। सफल रहा ऐतिहासिक लॉन्च सुबह करीब 11:30 बजे लॉन्च हुए विक्रम-1 ने निर्धारित योजना के अनुसार सभी चरण सफलतापूर्वक पूरे किए। मिशन के दौरान रॉकेट ने अपने पेलोड को तय कक्षा में पहुंचाया। पूरी प्रक्रिया पर इसरो के वैज्ञानिकों ने भी नजर रखी। मिशन की सफलता ने यह साबित कर दिया कि भारतीय निजी कंपनियां भी अब वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। https://twitter.com/AHindinews/status/2078368737640476933 स्पेस सेक्टर में क्रांति यह उपलब्धि केवल स्काईरूट एयरोस्पेस तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्ष 2020 में केंद्र सरकार द्वारा स्पेस सेक्टर में किए गए सुधारों का भी बड़ा परिणाम मानी जा रही है। सरकार द्वारा निजी कंपनियों के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र खोले जाने के बाद स्काईरूट जैसी कंपनियों को रॉकेट, सैटेलाइट और लॉन्च सेवाओं पर काम करने का अवसर मिला। उसी दिशा में विक्रम-1 की यह उड़ान एक महत्वपूर्ण कदम है। नई अंतरिक्ष छलांग स्काईरूट इससे पहले वर्ष 2022 में विक्रम-एस नामक सब-ऑर्बिटल रॉकेट का सफल परीक्षण कर चुकी थी। हालांकि उस मिशन में कोई उपग्रह कक्षा में स्थापित नहीं किया गया था। इसके विपरीत, विक्रम-1 एक पूर्ण ऑर्बिटल मिशन है, जिसका उद्देश्य विभिन्न ग्राहकों के छोटे उपग्रहों को लगभग 450 किलोमीटर ऊंचाई वाली लो-अर्थ ऑर्बिट में पहुंचाना है। यह तीन विकासात्मक मिशनों की श्रृंखला का पहला मिशन है, जिसके बाद कंपनी नियमित व्यावसायिक लॉन्च सेवाओं की दिशा में आगे बढ़ेगी। बेहतर ऑर्बिटल नियंत्रण विक्रम-1चार चरणों वाला आधुनिक रॉकेट है। इसके पहले तीन चरण ठोस ईंधन से संचालित होते हैं, जबकि चौथे चरण में लिक्विड फ्यूल इंजन लगाया गया है। इस इंजन को आवश्यकता पड़ने पर दोबारा चालू किया जा सकता है, जिससे उपग्रहों को उनकी निर्धारित कक्षा में अधिक सटीकता के साथ स्थापित करना संभव होता है। यही तकनीक इसे छोटे उपग्रहों के व्यावसायिक प्रक्षेपण के लिए बेहद उपयोगी बनाती है। भारत का निजी स्पेस मिशन स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना 2018 में इसरो के पूर्व इंजीनियर पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका ने की थी। कुछ ही वर्षों में कंपनी ने निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना ली है। विक्रम-1 की सफलता से न केवल स्काईरूट को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी, बल्कि भारत के निजी स्पेस उद्योग को भी नई गति मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि भविष्य में देश को वैश्विक कमर्शियल सैटेलाइट लॉन्च मार्केट में और अधिक मजबूत स्थिति दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। ये भी पढ़ें: दिल्ली में SIR प्रक्रिया बढ़ी आगे, 19 अक्टूबर को आएगी अंतिम मतदाता लिस्ट